अभी अभी तबियत ख़राब हुई तब लगा बीमारी कैसी भी हो छोटी या बड़ी बड़ा दुःख देती है।
आम तौर पर कहावत जो हमारे बड़े बूढ़े बोल कर गए है सच होती है यह तब एहसास हुआ जब हम बीमार हुए।
लोगो को तो हम बोल देते है चल कोई बात नहीं जुखाम है बस । पर जिसको हुआ है उसके दिल से पूछो वो किस हालत मे है ।
कोड़े की मार का एहसास उसको ही होता है जिसको चोट लगती है बाकि लोग तो बीएस साथ मे सांत्वना देने को ही होते है ।
अभी मेरे साथ बी एस ही हुआ बुखार हुआ था पर मे ही जनता हु कैसा हाल था मेरा। सलाह तो ऐसे मिल रही थी जैसे लग रहा था सामने वाले पनवारी और चाय वाले भी डॉक्टर बन सकते थे या कोई डिप्लोमा किया है दवाई बतने मे।
ना जाने कौन कौन सी बीमारी बता दी लोगो ने कोई कोई नाम तो ऐसे थे जैसे लग रहः था बुखार ना हुआ कोई अँगरेज़ विसराय का बच्चा गोद ले लिया हो मैंने ।
जब तक डॉक्टर को नहीं दिखा लिया तब तक तो मेरे प्राण ऐसे ही फसे रही ।
शुकर है की सीसोनल विरल फेवर था जो अब ठीक है
पर अनुभव बहुत कड़वा था जब तक डॉक्टर नए क्लेअर नहीं कर दिया की विरल है।
मगर ये बात मनानी पड़ेगी कोड़े की मार वही बता सकता है जिसको चोट पड़ती है।