Thursday, November 27, 2014

My Son

Aaye tum toh bahey failye hum baithay
Roye tum toh gabhraye hum baithay
Bhukey tum toh roti chodey hum baithay
Hasey tum toh chinta hum apni kho bitahy
Tere nanhey hatho ko lae apne hatho mae
Hum dono tere sath yeh duniya toh kho baithay😃😘

Saturday, September 13, 2014

जन्नत

कश्मीर के हालात पर एक कविता-----

ओ जन्नत के वाशिंदों,अब क्यों इतने लाचार हुए,
कहाँ तुम्हारी पत्थर ईंटे,कहाँ सभी हथियार हुए,
कहाँ गया जेहाद तुम्हारा,पाक परस्ती कहाँ गयी,
कहाँ गए वो चाँद सितारे,नूरा कुश्ती कहाँ गयी,
कहाँ गयी बाज़ार की बंदी,दीन के फतवे कहाँ गए,
केसर कहवा,सेब और अखरोटी रुतबे कहाँ गए,
पुन्य हिमालय की छाया में रहकर उसको गाली दी,
तुमने तब तब छेद किये है जब जब हमने थाली दी,
खूब जलाया ध्वजा तिरंगा,झंडा हरा उठाया था,
लाल चौक पर जब जी चाहा तब कोहराम मचाया था,
भारत के फौजी न तुमको फूटी आँख सुहाए थे,
नारे मुर्दाबाद हिन्द के तुमने रोज लगाए थे,
कुदरत कुछ नाराज़ हुयी तो,अल्ला अकबर भूल गए,
दाढ़ी टोपी तकरीरें,लाहौर पिशावर भूल गये,
अब क्यों चढ़े छतों पर घर की,क्यों झोली फैलाए हो,
जिन आँखों में नफरत थी क्यों उनमे आंसू लाये हो,
अरे मोमिनो,क्या अब भी आँखों पर पत्थर छाये है,
देखो,काफिर फौजी तुमको रोटी देने आये हैं,

Thursday, August 7, 2014

लाल

देख के आज एक पूत हुआ मै निहाल
अपनी माँ को उसने घर से निकाल दिया
कुत्ता लिया है पाल।

Thursday, July 24, 2014

कन्या रत्न

सावन का महीना है... तीज भी आने वाली है... ऐसे में मन को छू जाने वाली इस रचना को आप भी पढ़िए:

बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती है पीहर 

बेटियाँ 
पीहर आती है 
अपनी जड़ों को सींचने के लिए 
तलाशने आती हैं भाई की खुशियाँ
वे ढूँढने आती हैं अपना सलोना बचपन
वे रखने आतीं हैं 
आँगन में स्नेह का दीपक
बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर

बेटियाँ
ताबीज बांधने आती हैं दरवाजे पर 
कि नज़र से बचा रहे घर
वे नहाने आती हैं ममता की निर्झरनी में
देने आती हैं अपने भीतर से थोड़ा-थोड़ा सबको
बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर

बेटियाँ 
जब भी लौटती हैं ससुराल
बहुत सारा वहीं छोड़ जाती हैं
तैरती रह जाती हैं 
घर भर की नम आँखों में 
उनकी प्यारी मुस्कान
जब भी आती हैं वे, लुटाने ही आती हैं अपना वैभव 
बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर

.......

Tuesday, July 8, 2014

मिलन

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, यह प्यार नहीं है खेल प्रिये…

तुम एमए फर्स्ट डिवीज़न हो, मैं हुआ था मैट्रिक फेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, यह प्यार नहीं है खेल प्रिये…

तुम फौजी अफसर की बेटी, मैं तो किसान का बेटा हूं,
तुम रबड़ी-खीर-मलाई हो, मैं तो सत्तू सपरेटा हूं…
तुम एसी घर में रहती हो, मैं पेड़ के नीचे लेटा हूं,
तुम नई मारुति लगती हो, मैं स्कूटर लम्बरेटा हूं…
इस कदर अगर हम छिप-छिपकर आपस में प्रेम बढ़ाएंगे,
तो एक रोज़ तेरे डैडी अमरीश पुरी बन जाएंगे…
सब हड्डी-पसली तोड़ मुझे वह भिजवा देंगे जेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, यह प्यार नहीं है खेल प्रिये…

तुम अरब देश की घोड़ी हो, मैं हूं गदहे की चाल प्रिये,
तुम दीवाली का बोनस हो, मैं भूखों की हड़ताल प्रिये…
तुम हीरे-जड़ी तश्तरी हो, मैं एल्मुनियम का थाल प्रिये,
तुम चिकन-सूप-बिरयानी हो, मैं कंकड़ वाली दाल प्रिये…
तुम हिरन चौकड़ी भरती हो, मैं हूं कछुए की चाल प्रिये,
तुम चंदन वन की लकड़ी हो, मैं हूं बबूल की छाल प्रिये…
मैं पके आम-सा लटका हूं, मत मारो मुझे गुलेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, यह प्यार नहीं है खेल प्रिये…

मैं शनिदेव जैसा कुरूप, तुम कोमल कंचन काया हो,
मैं तन से मन से कांशी हूं, तुम महाचंचला माया हो…
तुम निर्मल पावन गंगा हो, मैं जलता हुआ पतंगा हूं,
तुम राजघाट का शांतिमार्च, मैं हिन्दू-मुस्लिम दंगा हूं…
तुम हो पूनम का ताजमहल, मैं काली गुफा अजंता की,
तुम हो वरदान विधाता का, मैं गलती हूं भगवंता की…
तुम जेट विमान की शोभा हो, मैं बस की ठेलम-ठेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, यह प्यार नहीं है खेल प्रिये…

तुम नई विदेशी मिक्सी हो, मैं पत्थर का सिलबट्टा हूं,
तुम एके-सैंतालिस जैसी, मैं तो एक देसी कट्टा हूं…
तुम चतुर राबड़ी देवी सी, मैं भोला-भाला लालू हूं,
तुम मुक्त शेरनी जंगल की, मैं चिड़ियाघर का भालू हूं…

Sunday, June 29, 2014

बेरोज़गारी

नौकरी की तलाश मे हम घर से इंटरव्यू के लिए भागे जा रहे थे।
रास्ते मे एक लड़का पानी मे डूबता हुआ दिखा ।
सोचा उसकी मदद करे या अपनी नौकरी देखे।
फिर लगा की मदद करते है । उसको अपना हाथ दिया और बोले आओ बहार । पूछते समय महाशेय से मालूम पड़ा यह तो वही इंटरव्यू के लिए जा रहे है जहा से हमे बुलावा आया है । यह तो दुश्मन की मदद जैसा हो गया ।
हमने दुनियादारी को मारो गोली और अपना काम देखो जनाब को हम फिर से धकेल के चलते बने।
यह नौकरी तो कही नहीं गयी यह सोचते हुए हम centeralised ac वाली एक बिलडिंग मे गए ।
interview मे मालूम पड़ा रिक्त स्थान तो भर गया ।
हम हैरान हमने पुछा सर आपका एक कैंडिडेट तो डूब गया मैं खुद देख के आया इतनी जल्दी आपको कोई और कर्मचारी कैसे मिल गया ।
वह मुस्कुराते हुए बोले आपने देरी कर दी ।
हमने पुछा केसे
फिर वह मुस्कुरात हुए बोले जिनको आप डूबता हुआ देखते हुए आये है । आपसे पहले उनको धक्का देने वाले यहाँ आये थे ।

Friday, June 27, 2014

ज़ख्म

ज़ख्म ही एहसास दिलाते है जिंदा हूँ मैं कुछ कर दिखने को और ज़ख़्म ले कर मैंदान मैं फिर उतर आने को

Thursday, June 26, 2014

सपने मेरे

सपने मेरे जगाये मुझको
नींद मेरी उडाये वो
दिन भर मैं भागू पीछे उनके
हाथ मेरे ना आये वो
जब मैं पुचकारा करू उनको
पंख लगा कर उड़ जाये वो
सपने मेरे अनोखे सबसे
नींद मैं ना आये वो
बस नींद मेरी उडाये वो

Wednesday, June 25, 2014

We The People (Indian)

As the assembly got a brand new PM most of the citizens are eyeing on him. As a saviour who will give the relief from inflation. But what they get another betrayal from another politicians. I pity on myself I am born in the era of fake and hypocrite people. They do not have ethics no humanity nothing. Doctor treats its patient as a client, teacher treats student As a client. And all of this going to be increase As the time increases. I am afraid for the coming generations. With very heavy heart I have to say I do not have any proud to be Indian now because those who represent the nation on the globe are fake and hypocrite. And I am very sad those who posted a positive mark for country are only our players none of the political leader is able to show his true face. Very Bad Very Sad