सपने मेरे जगाये मुझको नींद मेरी उडाये वो दिन भर मैं भागू पीछे उनके हाथ मेरे ना आये वो जब मैं पुचकारा करू उनको पंख लगा कर उड़ जाये वो सपने मेरे अनोखे सबसे नींद मैं ना आये वो बस नींद मेरी उडाये वो
No comments:
Post a Comment