Sunday, August 8, 2010

हमारा बचपन

this poem is dedicated to my memories of childhood i wish all my friends will appriciate my efforts to remember my childhood where they are also involved

बचपन का ज़माना होता था,
खुशियों का खज़ाना होता था|
चाहत चाँद को पाने की होती थी,
दिल तितली का दीवाना होता था|
खबर ना होती थी सुबहे की,
ना शाम का ठिकाना होता था |
थके - हरे आते थे स्कूल से,
पर खलने भी जानना होता था|
दादी की कहानी होती थी,
परियो का फस्साना होता था|
बर्रिश मई कागज़ की कश्ती होती थी,
पतंग संग उड़ जाना होता था|
चिलचिलाती धुप हो या कडकडाती ठण्ड',
हर मौसम सुहाना होता था|
हर खेल मई साथियो होते थे,
हर रिश्ता निभाना होता था|
मम्मी की वो डांट गलती पर'
अम्मा का मानना होता था|
गम की जुबान ना होती थी,
ना ज़ख्मो का पैमाना होता था|
रोने की वजह ना होती थी,
ना हसने का बहाना होता था|
अब नहीं रही वो जिंदगी'
जैसा बचपन का ज़माना होता था

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