Wednesday, February 27, 2013

Meri MAA


क्या सीरत क्या सूरत थी
माँ ममता की मूरत थी 
पॉव छुए और काम हुए
अम्माँ एक महूतर थी
बस्ती भर के दुख सुख में
माँ एक अहम जरूरत थी
उनसे भी प्यार उसे
उससे भी था प्यार उसे
उससे जिन्हे कदूरत थी
सच कहता है माँ हमको
तेरी बहुत जरूरत थी।

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