रुई के फाहे सी हलकी है ज़िन्दगी । वो तो ख्वाईश है जो बोझ बढ़ा देती है ।। मुहब्बत है हर तरफ यहाँ पर । वो तो सियसत है जो आग लगाती है ।। सुकून तो सिर्फ बचपन मए है दोस्त । वो तो घडी है जो बचपन चुरा ले जाती है ।।
काफी दिनों बाद खुद की कलम से
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