मूर्ख दिवस व चू## दिवस की सभी मूर्ख
वंश में पैदा होने वालों को हार्दिक बधाई
हो......
सुना है ४ अगस्त बकवास डे Sorry
फ्रेंडशिप डे है क्यों न कुछ नए दिन/ कुछ नए
त्यौहार भी ईजाद किये
जाये.......जैसे ........डिवोर्स डे ....कैजुअल
रिलेशनशीप डे (एक मिनट से लेकर चंद
मिनटों तक कुछ भी हो सकता है)
....पार्ट टाइम रिलेशनशीप डे (कुछ
भी हो सकता है)
....ब्रेकअप डे ....वर्जिनिटी लूसिंग डे
....वाइफ बीटिंग डे (उस दिन
पतियों को सब कुछ अधिकार होगा)
....हसबेंड बीटिंग डे (उस दिन
पत्नियों को सब कुछ अधिकार होगा)
बुद्धिमान सदस्य कुछ और भी जोड़े
तो अति कृपा होगी ......
अब कुछ कड़वा सत्य, जहाँ हमें प्लान करके
लूटा जाता है, और हम अपनी लुट्वाते रहते
है (क्या, क्या, ये लिखना फेसबुक के सम्मान
के खिलाफ होगा, सो यहाँ केवल पैसे-रुपये
की बात ही करते है)
बाकी तो मदर्स डे, फादर्स डे, ब्रदर्स डे,
सिस्टर्स डे, हस्बेंड्स डे, वाइफ्स डे..... और
भी पता नहीं क्या क्या ........’डे’
है...अभी बस इतना ही याद है, बाकी मैं
जानता नहीं ......ये सब इसी फेसबुक पर आकर
ही सीखा है,..
जय हो जुकरबर्ग (फेसबुक के जन्मदाता)
की.... वैसे बाकी दिन में ये सब रिश्ते
कहाँ चले जाते है, जैसे मदर, फादर, ब्रदर,
सिस्टर ...... इत्यादि इत्यादि, अभी तक
पता नहीं चला.......
अरे हाँ ........... एक तो मैं भूल
ही गया था .......”वैलेंटा इन डे”.......... जिस
दिन शमशान और कब्रिस्तान
का चौकीदार/डोम
भी लाखों नहीं तो हज़ारों तो कमा ही लेत
क्योंकि गुलाब तो छोड़ कोई भी फुल उस
दिन टोटल शार्टेज में होता है और कैजुअल
प्रेमियों की वहाँ लाइन लगी होती है....,
और चौकीदार ही केवल मुर्दों से मुरझाए
हुए फूल नोंच के ला सकता है, सुना है ....... कुछ
ख़ूबसूरत प्रेमिकायों के ऊपर मुर्दे वालाभूत
सवार हो जाता है और फिर उतरने का नाम
नहीं लेता और हो भी क्यों न........ भूत
का फूल हो तो भूत क्यों नहीं,
क्या भूतों का दिल नहीं होता......
मल्टीनेशनल की चांदी होती है, सुना है
कागज़ के कार्ड हज़ार-हज़ार के भी होते है,
और फूलों के लिए तो मर्डर हो जाता, उस
दिन कौन क्या-क्या लूटाता है,
वो लिखूंगा, तो लोग मेरे ऊपर टूट पड़ेंगे......
अभी अभी एक मुझे एक आदरणीय
सदस्यका मेसेज प्राप्त हुआ, उससे मुझे
अपनी कुछ भूल का एह्सास हुआ, कुछ
हिंसात्मक हो गई है....... इसलिए
करेक्सन....कोई “वाइफ बीटिंग डे” नहीं और
कोई ....”हसबेंड बीटिंग डे” भी नहीं
नया “डे” ये होना चाहिए.......
....वाइफ फ्रीडम डे (उस दिन
पत्नियों को पतियों से फुल फ्रीडम होगा,
और वो फुल छुट्टा सांडनी होगी)
....हसबेंड फ्रीडम डे (उस दिन
पतियों को पत्नियों से फुल फ्रीडम होगा,
और वो फुल छुट्टा सांड होगा)
वंश में पैदा होने वालों को हार्दिक बधाई
हो......
सुना है ४ अगस्त बकवास डे Sorry
फ्रेंडशिप डे है क्यों न कुछ नए दिन/ कुछ नए
त्यौहार भी ईजाद किये
जाये.......जैसे ........डिवोर्स डे ....कैजुअल
रिलेशनशीप डे (एक मिनट से लेकर चंद
मिनटों तक कुछ भी हो सकता है)
....पार्ट टाइम रिलेशनशीप डे (कुछ
भी हो सकता है)
....ब्रेकअप डे ....वर्जिनिटी लूसिंग डे
....वाइफ बीटिंग डे (उस दिन
पतियों को सब कुछ अधिकार होगा)
....हसबेंड बीटिंग डे (उस दिन
पत्नियों को सब कुछ अधिकार होगा)
बुद्धिमान सदस्य कुछ और भी जोड़े
तो अति कृपा होगी ......
अब कुछ कड़वा सत्य, जहाँ हमें प्लान करके
लूटा जाता है, और हम अपनी लुट्वाते रहते
है (क्या, क्या, ये लिखना फेसबुक के सम्मान
के खिलाफ होगा, सो यहाँ केवल पैसे-रुपये
की बात ही करते है)
बाकी तो मदर्स डे, फादर्स डे, ब्रदर्स डे,
सिस्टर्स डे, हस्बेंड्स डे, वाइफ्स डे..... और
भी पता नहीं क्या क्या ........’डे’
है...अभी बस इतना ही याद है, बाकी मैं
जानता नहीं ......ये सब इसी फेसबुक पर आकर
ही सीखा है,..
जय हो जुकरबर्ग (फेसबुक के जन्मदाता)
की.... वैसे बाकी दिन में ये सब रिश्ते
कहाँ चले जाते है, जैसे मदर, फादर, ब्रदर,
सिस्टर ...... इत्यादि इत्यादि, अभी तक
पता नहीं चला.......
अरे हाँ ........... एक तो मैं भूल
ही गया था .......”वैलेंटा इन डे”.......... जिस
दिन शमशान और कब्रिस्तान
का चौकीदार/डोम
भी लाखों नहीं तो हज़ारों तो कमा ही लेत
क्योंकि गुलाब तो छोड़ कोई भी फुल उस
दिन टोटल शार्टेज में होता है और कैजुअल
प्रेमियों की वहाँ लाइन लगी होती है....,
और चौकीदार ही केवल मुर्दों से मुरझाए
हुए फूल नोंच के ला सकता है, सुना है ....... कुछ
ख़ूबसूरत प्रेमिकायों के ऊपर मुर्दे वालाभूत
सवार हो जाता है और फिर उतरने का नाम
नहीं लेता और हो भी क्यों न........ भूत
का फूल हो तो भूत क्यों नहीं,
क्या भूतों का दिल नहीं होता......
मल्टीनेशनल की चांदी होती है, सुना है
कागज़ के कार्ड हज़ार-हज़ार के भी होते है,
और फूलों के लिए तो मर्डर हो जाता, उस
दिन कौन क्या-क्या लूटाता है,
वो लिखूंगा, तो लोग मेरे ऊपर टूट पड़ेंगे......
अभी अभी एक मुझे एक आदरणीय
सदस्यका मेसेज प्राप्त हुआ, उससे मुझे
अपनी कुछ भूल का एह्सास हुआ, कुछ
हिंसात्मक हो गई है....... इसलिए
करेक्सन....कोई “वाइफ बीटिंग डे” नहीं और
कोई ....”हसबेंड बीटिंग डे” भी नहीं
नया “डे” ये होना चाहिए.......
....वाइफ फ्रीडम डे (उस दिन
पत्नियों को पतियों से फुल फ्रीडम होगा,
और वो फुल छुट्टा सांडनी होगी)
....हसबेंड फ्रीडम डे (उस दिन
पतियों को पत्नियों से फुल फ्रीडम होगा,
और वो फुल छुट्टा सांड होगा)
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